मजदूरों के मामले में प्रधानमंत्री मोदी चूक कर गए अन्यथा कोरोना के मामले पर सफल ।



चीन में जब कोरोनावायरस ने आमद दर्ज कराई थी तब ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सारी व्यवस्था करने का ताना-बाना बुन लिया था और इस पर काम भी शुरू कर दिया था एक तो विदेशी फ्लाइटों को देर से रोकने की प्रक्रिया की गई जिसके कारण कोरोनावायरस भारत में आराम से प्रवेश कर गया शुरू में ही विदेशी पर्यटकों को अगर हवाई अड्डे पर रोक दिया जाता तो शायद भारत में कोरोनावायरस इतना गंभीर रूप नहीं लेता इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी एवं उनके मंत्रिमंडल ने बड़ी सूझबूझ से लॉक डाउन में स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से एवं पुलिस के माध्यम से कोरोनावायरस को रोकने में अहम भूमिका निभाई और वे इसमें सफल भी हुए। प्रधानमंत्री पर पूरे देश का भार होता है विशेषकर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर जवाबदारी को बहुत ही कुशलता पूर्वक निभाते हैं वह आने वाले संकट के निवारण के लिए तन मन से जुट जाया करते हैं इस आपदा से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल ने जो कार्य किए वह सराहनीय है किंतु प्रथम लॉक डाउन के समय उन्होंने मजदूरों के मामले में  चूक कर दी। लॉक डाउन से 10 दिन पहले मिलिट्री की मदद लेकर सरकार मजदूरों को उनके घरों पर भेजने की व्यवस्था करती तो मजदूरों की इतनी मिट्टी पलीत नहीं होती मजदूरों के दर्द भरे कष्टप्रद वीडियो को देखकर दिल दहल जाता है भारत के मजदूर कई किलोमीटर तक पैदल चलकर अपने घर जाने के लिए निकल पड़े थे क्योंकि शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं विशेषकर भोजन व रहने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी  व आर्थिक संकट से भी जूझ रहे थे इस अवधि में लोकल व्यक्तियों को भी उनकी मदद करने में परेशानी हो रही थी। 
हमने महाराष्ट्र के कई पैदल चलने वाले मजदूरों से बात की तो उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के लोग उन्हें पानी पीने के लिए भी नहीं दे रहे थे एवं शासन द्वारा मुहैया कराए जाने वाला खाद्यान्न पदार्थ भी उन लोगों को नहीं दिया जा रहा था मजदूरों का कहना था कि हमें खाने को भोजन नहीं मिल रहा एवं रहने को जगह नहीं है पैसा पास नहीं है अगर हमको मरना ही है तो क्यों ना हम अपने घर पर जाकर ही मरे इतने व्यथित बयानों को सुनकर मजदूरों की परेशानियों को देखकर कई समाजसेवी संस्थाओं ने विशेषकर पुलिस के अधिकारियों ने अभूतपूर्व सहयोग कर मजदूरों के हित में एक मिसाल कायम की कई बड़े-बड़े अधिकारियों को विशेषकर पुलिस के अधिकारियों को गरीब मजदूरों को भोजन कराते हुए देखा गया एवं मजदूर के बच्चों को जूता चप्पल पहनाते हुए देखा गया शुरू शुरू में मजदूरों के इस पैदल चलने की मुहिम में शासन ने विशेषकर केंद्रीय शासन ने काफी देर कर दी किंतु भारत के जागरूक नागरिकों ने रास्ते में चलने वाले मजदूरों का भोजन पानी एवं विशेष ध्यान देकर एक मिसाल कायम की या यूं कह सकते हैं कि पुलिस प्रशासन एवं जनता जनार्दन ने मिलकर उस चूक की कमी को पूरा कर दिया जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने में भूल गए थे। कई समाजसेवी संस्थाओं ने गुरुद्वारों ने मंदिरों की संस्थाओं ने व्यवसायियों ने पुलिस अधिकारियों ने नरेंद्र मोदी की इस चूक को पूरा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में ना सिर्फ अपना प्रेम जताया बल्कि पैदल चलने वाले मजदूरों को राहत प्रदान की कई पुलिस अधिकारियों ने अपने पैसों से पैदल चलने वाले मजदूरों को वाहन उपलब्ध कराया एवं चिकित्सीय सुविधा देकर भारत की भूमि को धन्य कर दिया पहली बार पुलिस का यह रूप जनता ने देखा वाकई भारत की पुलिस का यह रूप जनता ने देखा ऐसी पुलिस पर हम गर्व कर सकते हैं आज हर मजदूर पुलिस में अपनी सुरक्षा देखते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच चुका है देर से ही सही प्रांतीय सरकारों ने एवं केंद्रीय सरकारों ने बसें उपलब्ध करवाकर इस कमी को पाटने की कोशिश की है मजदूरों का पलायन उद्योग के क्षेत्र में काफी बड़ा संकट कहा जा सकता है क्योंकि उद्योग मजदूरों की मेहनत से ही खड़े होते हैं मजदूर एवं किसान इस देश की नींव है अगर मजदूरों को सरकार दैनिक जरूरतों की पूर्ति करने में विलंब करती है तो मजदूरों का विचलित होना स्वभाविक है। 
जिस प्रकार विदेश में रहने वाले भारतीयों को लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहल की वह सराहनीय है किंतु यही प्रयास मजदूरों के पक्ष में होता तो आज मजदूरों को इस परेशानी से दो-चार नहीं होना पड़ता इस बात को लेकर विपक्ष एवं पूरे देश में केंद्रीय सरकार की आलोचना हो रही है जो स्वभाविक भी है किंतु भारत की जनता ने पुलिस अधिकारियों ने एवं शासन के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी की इस कमी को पूरा करके एक मिसाल कायम की है जो अविस्मरणीय है। 

प्रधान संपादक करुणेश शर्मा 
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