भारत देश में विपक्षी पार्टियों का गिरता स्तर..






प्रधान संपादक करुणेश शर्मा की कलम से
भारतवर्ष की आजादी के साथ ही भारतवर्ष धर्मनिरपेक्ष होकर सत्तासीन हुआ तभी से देश में सभी धर्मों के लिए बराबरी का दर्जा भारत के संविधान से हमें प्राप्त हुआ यहां स्त्री पुरुष में कोई भेदभाव ना होकर सभी जाति समुदाय के लोग भाईचारे से मिलजुल कर रहते हैं यही नहीं संविधान ने मुस्लिम जाति के लिए एक विशेष एक्ट का निर्माण कर मुस्लिम भाई बहनों के लिए
एक व्यवस्था की गई प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से समय में विपक्ष का एक स्तर हुआ करता था विपक्षी दल सत्ता में बैठे हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रपति सेना अध्यक्ष व मंत्रिमंडल का सम्मान किया करते थे अगर किसी बात का विरोध भी करना होता था तो सम्मान के साथ विरोध का प्रदर्शन हुआ करता था और अगर सरकार कोई अच्छा कार्य करती थी या युद्ध के समय विपक्षी दल सरकार का समर्थन करके पूरी दुनिया में मिसाल कायम किया करता था पूर्व प्रधानमंत्री व तत्कालीन विपक्ष के नेता अटल बिहारी बाजपेई ने श्रीमती इंदिरा गांधी को देवी का अवतार बताकर एक मिसाल कायम की थी वह युद्ध के समय विपक्ष का इंदिरा गांधी को भरपूर समर्थन प्राप्त था किंतु वर्तमान में विपक्षी पार्टियों ने विपक्ष की भूमिका में रहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध व्यक्तिगत तौर पर कर कर विपक्ष की विश्व विश्वसनीयता पर एक प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बड़ा बहुमत लेकर सत्ता पर कॉलेज हुए उनकी इस सफलता को विशेषकर कांग्रेस पार्टी पचा नहीं पाई कांग्रेस पार्टी के अलावा सारे विपक्षी दल एक होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध शुरू कर दिया हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश हित में कई अच्छे व अविस्मरणीय फैसले लिए हैं जैसे कश्मीर समस्या का समाधान मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात सी ए ए का कानून मील का पत्थर कहा जा सकता है किंतु सारे विपक्षी दल इन सारे फैसलों के विरुद्ध जाकर प्रधानमंत्री को भला बुरा कह कर विपक्ष के स्तर को गिराने में लगे हुए हैं।।

कांग्रेस के कुछ चाटुकार नेता सेना अध्यक्ष को
गली का गुंडा कहकर अपमानित कर चुके हैं इससे ना सिर्फ सेना का मनोबल गिरता है।
बल्कि विपक्ष का स्तर लगातार गिरता चला जा रहा है जनता इस बात से विपक्ष से काफी नाराज रहती है इसी नाराजगी को जाहिर करने के लिए नरेंद्र मोदी को बार-बार भारी समर्थन देश का प्राप्त होता है देश के साथ साथ विदेश में भी नरेंद्र मोदी को काफी सम्मान विश्व स्तर के नेताओं के द्वारा मिल चुका है विरोध करने वाले विपक्षी नेता यह नहीं समझते कि नरेंद्र मोदी का अपमान भारत की 130 करोड़ जनता का अपमान है क्योंकि 130 करोड़ भारतीयों ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाया है कोई भी चुटकुला बड़बोला नेता यहां तक कि बच्चों के द्वारा भी नरेंद्र मोदी को गालियों से देश में नवाजा जा रहा है विश्व में शायद पहला ही भारत ऐसा देश होगा जहां कोई बच्चे से लेकर विपक्ष के नेता तक प्रधानमंत्री को गालियां देने में कोई कंजूसी नहीं करते विपक्ष के इस गिरते हुए स्तर कि विश्व स्तर पर काफी किरकिरी होती रही है यही कारण है कांग्रेसका छोटी-छोटी पार्टियों के पतन का जिन्होंने सिर्फ पैसा कमाने के लिए जातीयता की राजनीति के कारण पार्टियों को रसातल तक पहुंचा दिया है आज की स्थिति में विपक्ष कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है ।
विपक्षी पार्टियां नरेंद्र मोदी का विरोध करते करते भारत विरोधी ताकतों के समर्थन में आकर खड़ी होती दिखाई दे रही हैं शाहीन बाग दिल्ली के दंगे भारत के भारत के विरोध में पाकिस्तान के पक्ष में मणिशंकर अय्यर एवं कांग्रेस के बड़बोले नेताओं का वक्तव्य इस बात का उदाहरण है कि कांग्रेस पार्टी का कितना नैतिक पतन हो चुका है काग्रेस पार्टी में बयान वीर नेता
मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते हुए हिंदू धर्म के साथ-साथ हिंदू धर्म के देवी देवताओं को भी नहीं बख्श रहे हैं यही कारण है कि पाकिस्तान जैसा छोटा देश भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने में कोई कोताही नहीं कर रहा है इस कारण भारत के विपक्ष की दुनिया के मंच पर आलोचना हो रही है विपक्ष का स्तर जितना अभी गिरा है इसके पहले इतना स्तर कभी नहीं गिरा यही कारण है कि विपक्षी पार्टियां सिमट कर मुट्ठी बराबर रह गई हैं देश की संसद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस दिशा में एक कानून की दरकार है जो व्यक्ति स्वतंत्रता के नाम पर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की निम्न स्तरीय आलोचना एवं व्यक्तिगत आलोचना वो ऐसी बातें जो देश हित में ना हो ऐसे सख्त कानून की दरकार है ऐसे व्यक्तियों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए।
विपक्षी पार्टियों को सरकार के किसी फैसले का अगर विरोध करना है तो उसके लिए देश की संसद सड़कों पर विरोध व सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था संविधान में की गई है।
ऐसे कानून की आवश्यकता है किस संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की मर्यादा में रहकर आलोचना करना श्रेष्ठ है मर्यादाओं को लांग ने वाले व्यक्तियों को कानून का डर आवश्यक है।


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